नाग पूजा हमारे देश में बहुत से दिनों में मनाया जाता है। लेकिन विशेषकर नाग पंचमी में नाग पूजा की जाती है। नाग पूजा से हमे कोई लाभ नहीं होता। ये सिर्फ मनमाना आचरण है। गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में बताया गया है कि शास्त्र विधि को त्यागकर किया गया मनमाना आचरण व्यर्थ है। ऐसे मनमाने आचरण से कोई फायदा नहीं है। गीता अध्याय 4 के श्लोक 32-34 में बताया गया है कि तत्वदर्शी संत की खोज करने पर वह संत तत्वज्ञान का परिचय कराएंगे। फिर वही संत सही भक्ति विधि बता सकते है। वर्तमान में वे संत रामपाल जी महाराज है जो सही भक्ति विधि का ज्ञान करा रहे है।

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